Tuesday, September 1, 2009

सिंगापुर मेरी नजर में .....

हॉल में ही मैं सिंगापुर गया था - ये मेरी पहली बिदेश यात्रा थी अतः बहुत ही उत्साहित होना स्वाभाविक है । क्या खुबसूरत शहर - क्या सुंदर मनोरम दृश्य, मन को मोहित कर देने वाला नजारा । ऊँचे - ऊँचे गगन चुम्बी इमारतें - वास्तु कला का अद्वुत संग्रह । खुबसूरत चौडी सड़कें । सबकुछ एकदम ब्यबस्थित । अनुशाशित और पढ़े लिखे लोग । सब अपने काम में ब्यस्त । पर ये क्या - मजदूरी का काम शिर्फ़ भारत और बांग्लादेश के लोगों के जिम्मे --
पता है क्यों - लगभग शिर्फ़ ८०० बर्ग मील में फैले इस छोटे से द्वीप में पढ़े लिखे लोग ९७ % हैं इसलिए कोई भी मजदूरी या इस तरह का छोटा काम नही करता । शिक्षा यहाँ मुफ्त नही मिलती और न ही सरकार मुफ्त देती है पर अनिवार्य है अतः इसका पुरा इंतज़ाम है की कोई भी अनपढ़ न रहे।
मेरे गाइड ने बताया के चुकी यहाँ सब पढ़े लिखे ही हैं इसलिए हम लोग इंडिया से मजदुर लाते हैं जो वहां बहुतायत में उपलब्ध हैं, गरीबी और अनपढ़ होने की बजह से । वे ज्यादा कमाने के लिए तीन - चार घंटे ज्यादा काम भी करते हैं और अधिक कमाने के लालच में यहाँ टिके भी रहते हैं जिससे सिंगापुर के निर्माण का काम चलता है। और फिर सिंगापुर के डॉलर का मूल्य रूपया के मुकाबले बहुत अधिक है ये दूसरा आकर्षण है।
ये एक नंगा सच है जिसे नाकारा नही जा सकता पर एक सबक तो लिया ही जा सकता है इस छोटे से देश से -
किसी भी देश और वहां की जनता की तरक्की के लिए उचित शिक्षा उतनी ही जरुरी है जितना की भोजन , आवास और वस्त्र --- और सबसे ज्यादा स्वाभिमान -----
ये हैं मेरे बिहारी विचार ---
अवधेश

Check out Is the iron man melting?

Hi,

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Friday, August 28, 2009

ॐ शान्ति ॐ ......

लगता है , शायद भारतीय जनता पार्टी के अंदर की आग अब ज्वालामुखी बन के फूटने वाली है । अच्छी बात है - मन की बात अंदर मेल पैदा करती है। इसलिए, सब अपनी भंडास निकाल ही ले, तो ठीक है । फ़िर युवा नेत्रित्व का मुद्दा भी हल हो जाए तो सोने पे सुहागा । वैसे भी अंधेरे के बाद उजाला और बबंडर / तूफान के बाद तो शान्ति ही आती है । इसलिए जो हो रहा है अच्छा ही है और जो होगा वो और भी अच्छा ही होगा, पार्टी के लिए भी और देश हित में भी। यदि पार्टी के आला नेतागण अभी भी इस बात को नही समझते हैं तो ये दुर्भाग्य होगा। अतः समय की मांग है कि अब एक ही नारा - ॐ शान्ति ॐ .......


Monday, January 19, 2009

मुन्ना भाई "राज नेता" - ( हाई - टेक बस बाले)

क्यों मुन्ना भाई अब क्या इरादा है।
कुछ दिन पहले तक ठाकरे साहब से आशीर्बाद लेते थे।
फिर पिछले दिनों संकट में , बहन और कांग्रेस का सहारा था।
और अब अमर भइया का हाथ पकड़ लिया - आखिर क्या राज है ?
पूरे देश की जनता ने बहुत प्यार दिया है अभिनेता के रूप में इसलिए "राजनेता" का रोल अपने किसी अगली फ़िल्म में ही कर लेना। वैसे भी "हाई-टेक" बस से जनता की सेवा नही होनी है ये सबको पता है ।
बेचारी
जनता को अपने हाल पर छोड़ दो और अपनी "हाई - टेक बस" के साथ "मायानगरी" में लौट जाओ।
.............
बादा रहा ............... हम तुम्हे उतना ही प्यार करते रहेंगे ............. !!

Sunday, January 11, 2009

कब तक इंतजार

अमेरिका के चुने गए नए रास्त्रपति श्री बराक ओवामा ने चिंता जताई है की बम्बई की २६/११ वाली घटना को पुनः दोहराए जाने की आशंका से इंकार नही किया जा सकता और अमेरिका या कोई और भी उसका अगला निशाना हो सकता है । अलकायदा पर निगरानी रखने की जरूरत पर भी बल दिया पर पाकिस्तान पर क्या कार्यवाही होनी चाहिए इसपर कुछ भी नही कहा। ये दोहरी नीति क्यों। हम भारतीय भी टकटकी लगा कर देख रहे हैं उनकी तरफ़ न जाने किस उमीद में । मन उब गया है ये सब सुनते सुनते । यदि कुछ करना है तो करो नही तो राग अलापना और रोना बंद करो। जब अमेरिका को आतंकियो पर कार्यवाई करनी थी तो क्या उन्होंने किसी से पूछा था की क्या करे। बहुत हो चुकी नौटंकी और अब ये मान लो की कुछ नही किया जा सकता है और चुप हो जाओ ....