लगता है , शायद भारतीय जनता पार्टी के अंदर की आग अब ज्वालामुखी बन के फूटने वाली है । अच्छी बात है - मन की बात अंदर मेल पैदा करती है। इसलिए, सब अपनी भंडास निकाल ही ले, तो ठीक है । फ़िर युवा नेत्रित्व का मुद्दा भी हल हो जाए तो सोने पे सुहागा । वैसे भी अंधेरे के बाद उजाला और बबंडर / तूफान के बाद तो शान्ति ही आती है । इसलिए जो हो रहा है अच्छा ही है और जो होगा वो और भी अच्छा ही होगा, पार्टी के लिए भी और देश हित में भी। यदि पार्टी के आला नेतागण अभी भी इस बात को नही समझते हैं तो ये दुर्भाग्य होगा। अतः समय की मांग है कि अब एक ही नारा - ॐ शान्ति ॐ .......
Friday, August 28, 2009
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